कमिटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट्स (सीजेपी) ने फ़िलिस्तीनी-अमेरिकी पत्रकार शीरीन अबू अकलेह की मौत की स्वतंत्र व पारदर्शी जांच की मांग दोहराई है। वह इस्राइली सैनिकों के हाथों मारी गई थीं।
हाल ही में एक रिपोर्ट प्रकाशित हुई है जिसमें संकेत दिया गया है कि अमेरिका ने उनकी मौत के इर्दगिर्द हालात के आकलन में अपने निष्कर्षों को हल्का किया।
अबू अकलेह, जो क्षेत्र की विख्यात पत्रकारों में से एक थी, मई 2022 में वेस्ट बैंक में रिपोर्टिंग के दौरान मारी गई थीं। शुरू में इस्राइल ने इनकार किया था कि उनकी सेना ने उन्हें मारा था लेकिन बाद के दिनों में प्रकाशित कई स्वतंत्र जांच के अनुसार इस्राइल उनकी मौत के लिए जिम्मेदार था और यह भी पता चला कि इसके सैनिकों को पता था कि अबू अकलेह पत्रकार थीं।
अबू अकलेह की मौत के दो महीने बाद जुलाई 2022 में अमेरिका ने उनकी मौत को “त्रासद परिस्थितियों” के कारण हुआ बताया था। कर्नल स्टीव गाबाविक्स, जो उस समय जेरूसलम में अमरीका सुरक्षा कार्यालय में कार्यरत थे, ने अब सार्वजनिक रूप से कहा है कि वह और उनके सहकर्मी अमेरिका के मौत को इरादतन कहने से बचने के निर्णय से “हतप्रभ” हो गए थे।
गाबाविक्स, जिन्होंने मई 2022 गोलीबारी के सबूतों और जानकारी की समीक्षा की थी, ने कहा कि सामग्री एक जानबूझकर किए हमले का संकेत दे रही थी, उन्होंने इस्राइली रेडियो संचार का उदाहरण दिया जिसमें पत्रकारों की मौजूदगी, पत्रकारों की तरफ से कोई गोली न चलाए जाने की बात और अबू अकलेह और उनके सहयोगियों पर गोलीबारी के क्रम, जिनकी पत्रकारों के रूप में स्पष्ट रूप से पहचान की गई थी- माना गया था।
यह नए दावे उन आशंकाओं की पुष्टि करते हैं जो सीपीजे और कई अन्य संगठनों के अलावा अबू अकलेह के मीडिया संस्थान अल जज़ीरा ने जताई थी कि उन्हें पत्रकार के रूप में अपनी ड्यूटी करते समय जान बूझ कर निशाना बनाया गया था। उनके परिवार, सहयोगियों और प्रेस स्वतंत्रता समूहों की तरफ से विस्तृत दस्तावेजीकरण और अपीलों के बावजूद जवाबदेही अब तक मृग तृष्णा ही बनी हुई है। एफबीआई ने उनकी मौत की नवंबर 2022 में जांच शुरू की लेकिन जांच की प्रगति के बारे में अब तक कुछ नहीं बताया।
सीपीजे के सीईओ जोडी गिन्सबर्ग ने कहा कि अमेरिकी सरकार शीरीन अबू अकलेह के परिवार और जनता से सिर्फ अफसोस जताकर अपने कर्तव्य की इतिश्री नहीं कर सकती। सरकार की अपने नागरिकों के प्रति जिम्मेवारी है। नए खुलासे स्वतंत्र जांच करने की आवश्यकता पर बल देते हैं। मामले में जवाबदेही तय किए बिना इस्राइली सेनाएं पत्रकारों की जान लेती रहेंगी, क्योंकि उन्हें पता है कि ऐसा वह कोई नतीजा भुगते बिना कर सकती हैं।
सीपीजे की 2023 की एक रिपोर्ट के अनुसार अबू अकलेह की हत्या और इस्राइल रक्षा बलों का किसीको जिम्मेदार न ठहराने का मामला अकेला नहीं था बल्कि यह जवाबदेही से बचने के लिए बनाये गए पैटर्न का हिस्सा था।
सीपीजे के शोध के अनुसार 1992 से दुनिया भर में सबसे ज्यादा पत्रकारों को इस्राइल ने मारा है, इनमें 198 पत्रकार और मीडियाकर्मी 7 अक्टूबर 2023 के बाद गज़ा में मारे गए हैं जिनमें से 26 को जानबूझ कर निशाना बनाए जाने की आशंका है। इन हत्याओं के लिए किसीको जिम्मेदार नहीं ठहराया गया है।
(सीजेपी की वेबसाईट से साभार)